गीत : वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …


आसमानों से आगे और क्षितिज से दूर,
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …
रब की होगी रजामंदी उसमे,
और किस्मत को भी होगी कुबूल !
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …

सामने हैं समंदर मेरे पर कश्ती हैं बहुत दूर
लहरों की गुजारिश हैं संग खेलना हैं जरूर !
लगने दे डर थोडा, होने दे थोड़ी भूल
सैलाबों से लड़ना हैं तो हिम्मत भी दिखानी होगी जरूर !
कश्तियो सी डोलती और किनारों से दूर
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …

बचपन में सुनी थी एक कहानी मशहूर
जो रखता हैं धीरज वही जाता हैं दूर !
फूल तो मुरझाकर हो जाता हैं चूर
पर ये खुशबू उसकी हो जाती हैं मशहूर !
उस फूल सी कोमल और खुशबू से भरपूर
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …

पानी की खोज में गड्डा खोद रहा एक मजदूर
मिट्टी के ढेलो से पता पूछ रहा एक मजदूर !
जो मिल जायेगा पानी तो जी जायेगा ये मजदूर
वरना अपनी कबर तो खोद रहा ही ये मजदूर !
उस पानी सी बेशकीमती और कब्र सी निष्ठूर
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर….

वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर !
रब की होगी रजामंदी उसमे,
और किस्मत को भी होगी कुबूल !
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …

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वो गीतों में मेरे रंग भर देता हैं !!


वो गीतों में मेरे रंग भर देता हैं ,
छेड़कर तारों को तरंग भर देता हैं
मेरे ही ख्वाबो ख्यालो को बुनकर
इन गज़लों को मेरे संग कर देता हैं !

मैं सो भी जाऊ तो वो मेरे संग रहता हैं
बेरंग सपनो को सतरंग कर देता हैं
ये उसका ही हाथ रखा हैं मेरे ऊपर
जो हर मौसम को बदलकर बसंत कर देता हैं !

आवाज़ नहीं उसकी पर सुर निराले हैं
नज़र नहीं उसकी पर नैन मतवाले हैं
सारी दुनिया हमारी पर हम उसके दीवाने हैं
वही हैं जिसे हमसे इतने फ़साने लिखवाने हैं !

वो हर अहसास को मेरे आवाज़ दे देता हैं
शोर को भी साज़ दे देता हैं
ख्यालो को थोड़ी आँच दे देता हैं
और गीतों में मेरे बाँट देता हैं !

वो कविताओ में मेरी कूक भर देता हैं
दिल से निकली हूँक भर देता हैं
मेरे ही मुह से निवाला खाकर
वो मुझमे लिखने की भूख भर देता हैं !

मन को मेरे मलंग कर देता हैं
जोड़कर इरादों को बुलंद कर देता हैं
डर को डिब्बो में बंद कर देता हैं
और ज़ख्मो को इस कदर पैबंद कर देता हैं !

वो गीतों में मेरे रंग भर देता हैं ,
छेड़कर तारों को तरंग भर देता हैं !!

My third song – Dil ke rasto par…


As a lyricist and singer, my third song is unveiled.  It was originally a Gazal that I converted into song by adding rhyme and music. Hope you enjoy it and bless me with the shower of your love and encouragement.

Song can be listen at link – http://www.ujam.com/songs/9gMPMBrN59Z4

Here are the lyrics of song :-

दिल के रास्तो पर दलदल भी मिलेंगे
ख्वाब सजेंगे,
दिलबर मिलेंगे,
पर लोग भी जलेंगे !
तराने रूमानी ये सुहाने तो लंगेगे,
पर डर ये हैं,
बात ये हैं ,
कि लोग क्या कहेंगे !!
दिल के रास्तो पर ………………………………………..

कोई कुछ कहेंगे, कोई कुछ ना कहेंगे
बोलने वाले ,
पर कहने वाले,
चुप ना रहेंगे!
दरवाजे नसीबो के जरूर खुलेंगे
पर खेल जीवन के,
ढोंग बनावट के,
इरादे भी परखेंगे !!
दिल के रास्तो पर ………………………………………..

ना हैं कोई गीत ये, ना ही कोई ये ग़ज़ल हैं
लिखता हूँ मैं,
सुनाता हूँ मैं,
जो हाल -ए-दिल हैं !
सुनकर के आ जाये तुमको जो याद किसी अपने की
तो समझ लेना,
उससे मिलती,
मेरे यारो की शकल हैं !!
दिल के रास्तो पर ………………………………………..

Launching my second song


It’s the second time; I am trying to shape up my poem into beautiful song. This poem, I wrote two years back, it’s close to my heart but remain unnoticed. Now this song is reviving it into all together new dimension.  This song is dedicated to all those who love to see dreams and dares to achieve them. It’s a salute to all who are struggling or rather fighting to free their dreams, to find their way and to follow their soul.

Here is the you-tube link of song – Click here

You can find original poem at here – ख्वाबो-का-कारवां

Listen, Enjoy and Share !!!

Note: This song is written and sung by me only. However I used UJAM web site services for adding musical notes to song.

जवान


साल दर साल मेरे ख्याल बदलने लगे,
उमर जो बढ़ी तो बाल पकने लगे !
वो मासूमियत तो बचपन कब का अपने साथ ले गया,
अब तो लड़कपन के मुंहासे भी सूरत से झरने लगे !
वो माँ हैं जो कहती हैं कि मैं अब भी बच्चा हूँ,
वरना कुछ लोग तो मुझे अभी से बूढ़ा भी कहने लगे !
ये आईना ही हैं जो अपने दाम का पूरा हक अदा करता हैं,
दाढ़ी मुछे जो हटाई तो गा्ल गुलाबी चमकने लगे !
हम निकले जब भी ऐसे सज-धजकर शहर के बाजारों से,
हसिनाओ की नजर ना पड़ी पर बुजुर्ग जरूर बातें करने लगे !
कुछ समझाइश देने लगे, कुछ खरीद-फ़रॉख्त करने लगे,
गोयाकी हम इश्क़ खरीदना चाहते थे और वो शहनाई बेचने लगे !
यहाँ सब लोग कहते हैं कि तुम जवान हो गए ठाकुर
पर लोगो के ऐसे जोक मुझे हैरान करने लगे !
कुछ हैं जो बहुत पीछे छोड़ आये हैं हम
याद वो आता नहीं पर हम इंतज़ार करने लगे !

Releasing my first song “एक दिन दोस्तों के बिन !”


It all started one night…no…No…no…that was not night…that was the morning or rather dawning. I was enjoying into the deep depth of dreams and suddenly my alarm started ringing. It was 6 in the morning. I badly wanted that somehow alarm stop ringing automatically as it was out of the reach of my hands. But…no…it was continuously crying…and finally I stood up and stopped the alarm. I really wanted to go back into that dream but till the time that moment went out from my hands.  With heavy heart…I went into wash room…and at that time I recalled that I was watching a video song in the dream. I put some more pressure on mind and tried to recall the lyrics…but unfortunately I didn’t recall anything except one line. I missed the song but good thing is that I remembered that one line completely with tune and lyrics.

I washed the face and started my daily activity but that one line was continuously crooning inside the head. I tried to recognize whether I heard those words or tune earlier but I didn’t find any. Then I thought I should I record it as it was the invention of my dreams. I added few more lines on the same tune and recorded in my laptop. Later, I tried to complete that song by adding some more lines and rhyme but…bad luck…I could not convert those lines into the complete song.

I still not completed that song of my dreams but that incident evoked an idea in mind to compose and sing my own poetry. And guess what…on the investment of Friday morning and complete weekend; I finally came up with the song on one of my poem. I uploaded it at YouTube too with slideshow of few beautiful images. And finally, I am releasing the song at blog today. SO LADIES AND GENTLEMAN, As a lyricist and singer, Ankit R S Solanki is releasing his first song “एक दिन दोस्तों के बिन !”(I can hear the clap sound and cheering gestures of big crowdJ )

And yeah song is dedicated to all my friends ….

Here is the link of song –http://www.youtube.com/watch?v=pyOdIEEvWZg&feature=share

well, keep the big words aside, it’s just first attempt of me to tune the poetry into song…so please…please…please…just listen it (at least once) …and put all your emotion, appreciation, suggestion, objection, recognition in comments section.

Eagerly waiting for your reactions and comments (what do you say it’s a WOWor WHAT THE HELL!!!)

-Ankit R S Solanki

“एक दिन दोस्तों के बिन”


कैसे गुजरा वो एक दिन,
एक दिन दोस्तों के बिन !
शुरू हुआ बिना शोर के,
ख़त्म हुआ शरारतो के बिन !
…वो एक दिन दोस्तों के बिन…

याद किया उन यारो को,
यादो को, यारो के बिन !
कुछ गुजरे हुए उजले दिनों की,
बातो को, खुराफातो को, आफतो के बिन !

…कैसे गुजरा वो एक दिन…
…एक दिन दोस्तों के बिन …

 

ऊँचे, नाटे, दुबले, मोटे
हर किस्म के नमूनों को बीन
रंग जमाती थी टोली मेरी
टुएशन हो या टपरी केन्टीन

ना था मैं अलादीन उनका
ना थे वो मेरे जिन्न
फिर क्यों अधूरी हर ख्वाहिश मेरी
उन खुसठ खरगोशो के बिन !

…कैसे गुजरा वो एक दिन…
…एक दिन दोस्तों के बिन …

 

चाल में थी मस्ती उनके
और आँखों में थे दूरबीन
दिल के थे लाख भले वो
पर हरकतों से थे पूरे कमीन

ना था उनमे सलमान कोई
ना ही था कोई उनमे सचिन
फिर क्यू रात अँधेरी मेरी
उन अनजान सितारों के बिन

…कैसे गुजरा वो एक दिन…
…एक दिन दोस्तों के बिन …

 

कोई डूबा कन्या के जाल में
तो कोई था बस किताबो में तल्लीन
हर कोई था कुछ हट के जरा
थोडा सा मीठा तो थोडा नमकीन

ना था कोई शेक्सपीयर उनमे
ना था कोई अलबर्ट आइन्स्टीन
फिर क्यू खाली दुनिया मेरी
उन महा-नालायक महा-पुरुषो के बिन

…कैसे गुजरा वो एक दिन…
…एक दिन दोस्तों के बिन …