मज़बूरी का नाम गाँधी नहीं हैं !


gandhi

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“बरामदे की धूप” available in book format


bkd_back_pagebkd front pageIts an year and so, I haven’t update anything in blog. But good news is that I was trying to publish the content of blog in the form of book…and result is fruitful. All the poems of this blog are available in the form of book and e-book.You can buy it from online websites.

Hope all my readers love this sunshine of gallery.

And yes…this year I will be active…promise.

Here are the links of book.
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चाँद की तिजोरी


बादलो में छिपा दी हैं मेने चाँद की तिजोरी
बारिश तक तो ना पकड़ी जायेगी अब मेरी चोरी

चाँद को भी खबर नहीं और बादलो को भी नहीं हैं जानकारी
इतनी शातिर तरीके से की हैं मेने ये कारीगारी

वैसे चाँद की तिजोरी में नहीं हैं हीरे मोती जवाहरी
उसकी तिजोरी में तो हैं बस एक गुलाबी गठहरी

और उस गठहरी में बंद हैं एक सुनहरी परी
जिसके इंतज़ार में रहता हूँ मैं हर घडी

मैं इन्तेज़ार में हूँ की कब लगेगी बारीशो की झडी
और बूंदों के संग आ जायेगी आसमान से वो परी

सोचता हूँ जो होती मेरे पास एक लम्बी छड़ी
बादलो को हिलाकर सारी बुँदे गिरा देता इसी घडी

पर फिर सोचता हूँ की दुर्घटना से देर भली
कही मेरे प्रहार से घायल ना हो जाये वो परी

नाज़ुक हैं वो मोम सी और चखने में हैं गुड की डली
अरमान हैं वो आसमान का और सितारों के संग हैं पली

मिटटी से रंग में मेरे छाई हैं वो बन कर धुप सुनहरी
अब तो आखो में भी रहने लगी हैं वो दिलकश दुपहरी

खुश था खुदा भी मुझसे जो उसने भर दी मेरी झोली
तमन्ना की मोती की और मिल गयी मुझे चाँद की तिजोरी

दुआओ से आप सबकी मेरी हो जाएगी एक दिन वो सुनहरी परी
तब तक के लिए इज़ाज़त चाहूँगा मैं एक चोर अजनबी

Dream, Dare and Define the Destiny


In this whole world, it’s just you and your integrity are with you
In this whole planet, it’s just you and your integrity are in your control
Believe in you and feel the integrity
Because rest of the world is just shape of this unity.

Close the eyes and see your eternity
Listen your voice and know the almighty
When you break the boundaries and touch the equity
You will know one truth of law of dignity.

You are not here to repeat the heredity
You are here to dream, dare and define your destiny.

(Note – This poem is purely inspired by Rabindranath Tagore’s poem ‘Where the knowledge is free.’)

 
~ Ankit Solanki

 

मौसम


रूखे हाथो ने क्या सजावट की हैं
की आज फिर कोरे पन्नो पे लिखावट की हैं

सर्द हवाओ ने मेरी चौखट पे ये आहट की हैं
कि अल्फाज़ ही अब एक चीज़ राहत की हैं

समेट लू धूप की अब इसकी आदत सी हैं
या ओढ़ लू अंगारे की अब बात सेहत की हैं

मुझसे ना पूछो मेने ना कभी मोहब्बत की हैं
कि आशिको को किस मौसम ने राहत दी हैं

हमने तो अपनी ज़िन्दगी में यही इबादत की हैं
चार लफ्ज़ और एक अहसास से हमेशा चाहत की हैं

‘ठाकुर’ तुम्हारी गज़लों ने जब से सर्दियों की सोहबत की हैं
हर शख्स ने इस मौसम की हमसे शिकायत की हैं

गीत : वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …


आसमानों से आगे और क्षितिज से दूर,
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …
रब की होगी रजामंदी उसमे,
और किस्मत को भी होगी कुबूल !
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …

सामने हैं समंदर मेरे पर कश्ती हैं बहुत दूर
लहरों की गुजारिश हैं संग खेलना हैं जरूर !
लगने दे डर थोडा, होने दे थोड़ी भूल
सैलाबों से लड़ना हैं तो हिम्मत भी दिखानी होगी जरूर !
कश्तियो सी डोलती और किनारों से दूर
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …

बचपन में सुनी थी एक कहानी मशहूर
जो रखता हैं धीरज वही जाता हैं दूर !
फूल तो मुरझाकर हो जाता हैं चूर
पर ये खुशबू उसकी हो जाती हैं मशहूर !
उस फूल सी कोमल और खुशबू से भरपूर
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …

पानी की खोज में गड्डा खोद रहा एक मजदूर
मिट्टी के ढेलो से पता पूछ रहा एक मजदूर !
जो मिल जायेगा पानी तो जी जायेगा ये मजदूर
वरना अपनी कबर तो खोद रहा ही ये मजदूर !
उस पानी सी बेशकीमती और कब्र सी निष्ठूर
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर….

वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर !
रब की होगी रजामंदी उसमे,
और किस्मत को भी होगी कुबूल !
वो मंजिल मुझे मिलेगी जरूर …